देशनई दिल्लीराजनीति

आगरा हत्याकांड के मुद्दे को हमेशा की तरह नज़रंदाज़ किया गया, लेकिन विपक्षी दलों ने सड़क पर उतरकर इस मुद्दे को ज़िंदा कर दिया!

श्याम मीरा सिंह

नई दिल्ली। अरुण वाल्मीकि के मुद्दे को हमेशा की तरह नज़रंदाज़ किया गया, लेकिन प्रियंका गांधी ने सड़क पर उतरकर इस मुद्दे को ज़िंदा कर दिया और योगी सरकार को नंगा किया। आज पीड़ित परिवार को सीमित ही सही लेकिन न्याय मिला, विपक्ष में प्रियंका भी हैं विपक्ष में मायावती भी, लेकिन मायावती ग़ायब हैं।

प्रियंका, अखिलेश और चंद्रशेखर ने वंचितों के हर मुद्दे पर आवाज़ उठाई है, मायावती दलित वर्ग के मुद्दों पर सड़क पर आने में रुचि नहीं रखतीं। मायावती की निष्क्रियता ने दलित एकता को छिन्न-भिन्न कर दिया है। मायावती के पास दलितों में भी केवल अपनी ही एक जाति रह गई है। बाक़ी दलित इधर उधर या भाजपा में चले गए. नहीं तो दलितों से बड़ा वर्ग आज भी यूपी में कोई नहीं है। वो जो चाहते आज होता लेकिन नहीं हो पा रहा। क्यों? क्योंकि नेतृत्व ही अब भरोसेमंद नहीं रहा।

दलितों को कोरोना में बिस्तर नहीं मिले, डेंगू का इलाज नहीं मिला, कितने दलितों को मार दिया गया। कितनों के मुक़दमें भी दर्ज नहीं हुए। हाथरस रेप जैसा जघन्य कांड हुआ, लखीमपुर खीरी जैसा डरावना मामला हुआ, पूरा विपक्ष लखीमपुर पहुँचता है पर मायावती नहीं। अगर मायावती को दलितों के मुद्दे पर भी सड़क पर लड़ने में रुचि नहीं है तो इस वर्ग को चंद्रशेखर की तरफ़ देखना चाहिए. चंद्रशेखर मजबूत और मेहनती आवाज़ हैं। उनका क़द बड़ा होता है तो लोगों में दोबारा से विश्वास पैदा हो सकता है। बेशक मायावती आज भी अपने आप में एक विशाल साम्राज्य हैं, लेकिन उन्हें विशाल साम्राज्य बनाया भी दलित जनता ने है। अगर वे मायावती को बना सकते हैं तो चंद्रशेखर तो और भी अधिक गंभीर और मारक आवाज़ हैं।

(Credit Fb Shyam Meera Singh)

Tags

redbharat

हर खबर पे नजर, दे सबकी खबर

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!
Close
Close