इंदौरमध्य प्रदेश

देश के ख़ज़ाने में टैक्स अदा करने वाली प्रमुख कंपनियों की सूची में अडानी की एक भी कंपनी नहीं!

गिरीश मालवीय

क्या इस नुकसान की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं को बिजली की ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी?

इंदौर/मध्य प्रदेश। यह है असलियत गौतम अडानी की! जिनके दो नंबरी अमीर बनने पर भक्त लहालौट हो रहे हैं! यह तस्वीर बता रही है कि वित्तीय वर्ष 2019-20  में देश के ख़ज़ाने में टैक्स अदा करने वाली प्रमुख कंपनियों की सूची में अडानी की एक भी कंपनी नहीं है!यह जी हां यह सच है कि टैक्स देने वाली टॉप 20 कंपनियों में एक भी कंपनी अडानी की नही है और कल ख़बर आई है कि गौतम अडाणी के नेतृत्व वाली कंपनी समूह पूंजीकरण के लिहाज से देश में नंबर वन बन गया है। अडाणी समूह ने 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) के साथ सूचीबद्ध टाटा समूह (जिसमें 27 फर्में शामिल हैं) को पीछे छोड़ दिया और मुकेश अंबानी की नौ कंपनियों का समूह 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बाजार पूंजीकरण के साथ सूची में तीसरे स्थान पर चला गया है।

आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले ख़बर आई थी कि अनिल अंबानी की रिलायंस एनर्जी को अडानी ट्रांसमिशन ने 18,800 करोड़ रुपये में खरीद लिया। इस बारे में सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी तो पता चला कि रिलायंस एनर्जी ने 1451.69 करोड़ रुपये के कई करों का भुगतान महाराष्ट्र सरकार को नहीं किया है। जबकि कंपनी ने यह पैसा उपभोक्ताओं से सरचार्ज, टॉस, ग्रीन सेस और सेल्स टैक्स आदि के नाम पर वसूले थे।

गलगली ने बताया कि आरटीआई दायर करने के बाद महाराष्ट्र सरकार हरकत में आई और रिलायंस एनर्जी को नोटिस भेजा। बीते तीन नवंबर को डिविजन इंस्पेक्टर मीनाक्षी ने रिलायंस के जनरल मैनेजर को नोटिस भेज बकाया पैसा जमा करने को कहा। गलगली ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कहा कि रिलायंस एनर्जी के बैंक एकाउंट को फ्रीज़ कर मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। ‘अगर अब रिलायंस एनर्जी को अडानी ट्रांसमिशन ने ख़रीद लिया है तो 1451.69 करोड़ रुपये का भुगतान कौन करेगा?

क्या इस नुकसान की भरपाई के लिए उपभोक्ताओं को बिजली की ज़्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी कि इतनी बड़ी रकम बकाया होने के बावजूद भी रिलायंस कैसे अडानी को कंपनी बेच सकती है। सरकार को बकाया राशि पर 24 प्रतिशत का ब्याज लेना चाहिए और ज़रूरी कार्रवाई करने का आदेश देना चाहिए। वरना यह सवाल हमेशा बना रहेगा कि आख़िर टैक्स का पैसा कौन भरेगा।’ अडानी ने होल्सिम के साथ को अल्ट्रा टेक कम्पनी की डील की है, उसमें भी टैक्स भरने को होलसिम वालो ने मना कर दिया है, यानि वहा भी लोचा है।

इससे पहले भी कई बार अडानी की कंपनियों के बारे में टैक्स चोरी के मामले सामने आए हैं। लेकिन सब पर पर्दा डाल दिया गया। वजह सब जानते हैं कि सैंया भए कोतवाल तब डर काहे का।

(Credit Fb Girish Malviya)

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