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राजस्थान: चिट्ठी वाले विधायक और वीडियो वाले विधायक?

देवेंद्र यादव-

सरकार की कार्यशैली को लेकर कांग्रेस के विधायक अपनी सरकार को कटघरे में खड़ा करने में जुटे!

राजस्थान। विधानसभा के दो विधायक भरत सिंह कुंदनपुर और मदन दिलावर, राजस्थान हाडोती संभाग में मीडिया के भीतर और मीडिया के बाहर राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा में हैं! दोनों विधायकों का चर्चा में होने का कारण यह नहीं है कि दोनों विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों में जनहित में कोई ऐतिहासिक काम किया हो या फिर दोनों विधायकों ने कोई ऐसा बयान दिया हो जिसके कारण वह चर्चा में हो?

बल्कि राजस्थान में सत्ताधारी कांग्रेस के विधायक भरत सिंह कुंदनपुर, अपनी ही पार्टी की सरकार को 4 साल से विभिन्न विषयों को लेकर लगातार पत्र लिख रहे हैं, विधायक कुंदनपुर के द्वारा लिखे गए पत्र समाचार पत्रों में भी प्रकाशित होते रहते हैं इसलिए अब कुंदनपुर के पत्र मीडिया के भीतर और मीडिया से बाहर चर्चा का विषय बन गए हैं?

इसी तरह हाड़ौती संभाग के कोटा जिले के दूसरे भाजपा विधायक मदन दिलावर भी कांग्रेस सरकार के खिलाफ लगातार वीडियो बनाकर डालने के कारण मीडिया के भीतर और मीडिया से बाहर चर्चा में हैं? मजेदार बात तो यह है कि भरत सिंह देश की प्राचीन तकनीक को अपनाते हुए चिट्ठी के माध्यम से सरकार के सामने अपनी बात और अपना विरोध रख रहे हैं जबकि भाजपा विधायक आधुनिक तकनीक वीडियोग्राफी का इस्तेमाल कर रहे हैं!

भरत सिंह और मदन दिलावर राजस्थान विधानसभा में वरिष्ठ विधायक की श्रेणी में आते हैं और दोनों ही अलग-अलग समय पर राज्य सरकार में काबीना मंत्री जी रहे हैं! दोनों ही विधायक राजस्थान में प्रभावशाली नेता भी हैं! भरत सिंह कांग्रेस के और मदन दिलावर भाजपा के कद्दावर नेता हैं दोनों ही चार बार के विधायक! इसलिए राजस्थान की राजनीति में उनके द्वारा कहे गए शब्द असरदार होते हैं!

भाजपा विधायक मदन दिलावर विधानसभा के अंदर और विधानसभा के बाहर सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को हमेशा विभिन्न मुद्दों पर हमेशा घेरते हुए दिखाई देते हैं! भरत सिंह अपनी ईमानदारी और बेबाकी के लिए राजस्थान की राजनीति में जाने जाते हैं! यदि उनकी पार्टी की सरकार में भी कोई गलत काम हो रहा है तो भरत सिंह उसका पुरजोर तरीके से विरोध करते हैं!

इस समय भरत सिंह इसी कारण चर्चा में है क्योंकि उन्हें लग रहा है कि राजस्थान के खनिज विभाग में कुछ गड़बड़ चल रहा है भरत सिंह ने इस गड़बड़ी के लिए सीधे राज्य के खनिज मंत्री को अपने निशाने पर लिया है? भरत सिंह और राज्य के खनिज मंत्री प्रमोद भाया जैन दोनों ही हाड़ौती संभाग से आते हैं! भरत सिंह और प्रमोद जैन भाया दोनों ही झालावाड़ संसदीय क्षेत्र से अलग-अलग समय पर में कांग्रेस के सिंबल पर लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं!

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के दूसरे कार्यकाल में प्रमोद जैन भाया राज्य के सार्वजनिक निर्माण मंत्री बने थे जो अपना 5 साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए थे और उन्हें बीच में ही मंत्री पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह सार्वजनिक निर्माण मंत्री भरत सिंह को बनाया गया था! कांग्रेस के बड़े नेता 2023 में लगातार दूसरी बार कांग्रेस की सरकार बनाने के बयान दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अपनी ही पार्टी की सरकार की कार्यशैली को लेकर कांग्रेस के विधायक अपनी सरकार को कटघरे में खड़ा करने में जुटे हुए हैं!

अभी-अभी राजस्थान के उदयपुर में कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्तर का नव संकल्प चिंतन शिविर आहूत किया था जिसमें कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने कांग्रेस के नेताओं को सलाह दी थी कि नेता कोई भी विवाद हो या कोई बात हो उसे सार्वजनिक मंच पर नहीं करें बल्कि घर में बैठकर आपस में बात करें? नव संकल्प शिविर को गुजरे एक महीना भी नहीं बीता है इससे पहले ही राजस्थान में कांग्रेस के विभिन्न विधायकों और मंत्री के स्वर अपनी ही सरकार की कार्यशैली के विरोध में सुनाई देने लगे हैं!

27 मई को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा एक दिवसीय कोटा प्रवास पर कोटा आए थे, उनसे मिलने ना तो विधायक भरत सिंह आए और ना ही विधायक रामनारायण मीणा!

गोविंद सिंह डोटासरा पत्रकारों के सवाल के जवाब में यह बता रहे थे कि राजस्थान में कांग्रेस एकजुट है और कांग्रेस के नेताओं में बिल्कुल भी मन भेद नहीं है! जबकि ठीक उसी समय भरत सिंह का पत्र चर्चा में था!

वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र यादव कोटा, राजस्थान

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