प्रतापगढ़

श्रीमद् भागवत कथा के श्रवण से होती है दिव्य ज्ञान की प्राप्ति: पं. शेषधर मिश्र ‘अनुरागी’

शिवाकांत द्विवेदी

लालगंज, प्रतापगढ़। सांगीपुर क्षेत्र के बसुआपुर लक्ष्मीकांतगंज में श्रीमद भागवत कथा के सप्ताह ज्ञान यज्ञ के सप्तम व समापन दिवस पर पं. शेषधर मिश्र ‘अनुरागी’ने भगवान श्री कृष्ण के 16108 विवाह का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि दिव्य ज्ञान से मानव अपने जीवन का कल्याण कर सकता है। ज्ञान के बिना इंसान अपने जीवन के सर्वोच्च स्थान को नहीं प्राप्त कर सकता है। इसके लिए जरूरी है कि वह धर्म का अनुशरण करे। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि व्यक्ति का आचरण भी उच्च हो। बिना इसके ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं।

भगवान ने कैसे परीक्षित को उत्तम लोक की प्राप्ति कराई। सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को भागवत महापुराण सात दिन के अंदर सुना कर उन्हें भगवत धाम का अधिकारी बनाया। मरने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए, इस प्रश्न के उत्तर में सुखदेव जी ने राजा परीक्षित को सात दिन तक भागवत सुनाई। जब तक्षक नाग राजा परीक्षित को डसने आया, उससे पहले राजा परीक्षित भगवान के धाम में मन लगा कर बैठ गए और तक्षक का स्पर्श होने से केवल शरीर नष्ट हुआ आत्मा को कोई कष्ट नहीं। इतना दिव्य ज्ञान सूतजी महाराज ने ऋषियों को दिया।

भागवत महापुराण का सदा श्रवण करना चाहिए, बार-बार करना चाहिए यह भगवान की अनंत कथा है, जो कभी समाप्त नहीं होती है। यह निरंतर चलती रहती है। इस मौके पर आयोजक सुरेंद्र मिश्र व धर्मेंद्र मिश्र संयोजक कौशल मिश्र समेत पं.पारसनाथ तिवारी, दयाराम मिश्र, कमल मिश्रा माही, प्रांजल शुक्ला, शुभम श्रीवास्तव, सुमित तिवारी ‘वत्सल’ शुभम तिवारी, दिलीप कुमार पांडेय, अमित कृष्ण मिश्र, अनमोल कृष्ण शास्त्री, बेबी पाण्डेय, क्षमा शुक्ल, प्रीति शुक्ला, रिया मिश्रा, नीतू मिश्रा, सुषमा शुक्ला, सुरेश तिवारी, आशुतोष शुक्ल, दिव्यांश मिश्रा, अभिषेक मिश्र, सुधीर तिवारी, अरविंद मिश्र, राहुल पाण्डेय, शिवकांत पाण्डेय आदि सैकड़ो श्रोता मौजूद रहे ।

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